Global Gender Gap Index वैश्विक लैगिंक अंतराल सूचकांक 2024
"वैश्विक लैंगिक अंतराल सूचकांक 2006 से विश्व आर्थिक मंच द्वारा जारी किया जा रहा है।
जानें कैसे यह सूचकांक विभिन्न देशों में पुरुषों और महिलाओं के बीच असमानताओं को मापता है और इसके चार प्रमुख क्षेत्रों की विस्तृत जानकारी।"
वैश्विक लैंगिक अंतराल सूचकांक (Global Gender Gap Index) विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) द्वारा जारी किया जाता है, जो विभिन्न देशों में पुरुषों और महिलाओं के बीच लैंगिक अंतर को मापने का एक साधन है। इस सूचकांक के माध्यम से यह आंका जाता है कि विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं और पुरुषों के बीच समानता कितनी है।
इस सूचकांक में चार प्रमुख क्षेत्रों का आकलन किया जाता है:
1. आर्थिक भागीदारी और अवसर
2. शिक्षा प्राप्ति
3. स्वास्थ्य और जीवन प्रत्याशा
4. राजनीतिक सशक्तिकरण
वैश्विक लैंगिक अंतराल सूचकांक (Global Gender Gap Index) पहली बार 2006 में विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) द्वारा लॉन्च किया गया था। जिसमें दुनिया भर की 146 अर्थव्यवस्थाओं में लैंगिक समानता का व्यापक मानकीकरण किया गया है।
वैश्विक लैंगिक अंतराल सूचकांक 2024 में भारत का स्थान - 129वां
जारीकर्ता - विश्व आर्थिक मंच (WEF)
शीर्ष 3 देश
1. आइसलैंड
2. फिनलैंड
3. नॉर्वे
लैंगिक समानता को मापने के लिए बनाया गया एक सूचकांक है
इस सूचकांक में आइसलैंड लगातार 15वें साल पहले स्थान पर रहा है।
महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण में भारत ने वैश्विक स्तर पर 65वां स्थान हासिल किया।
साल 2024 में वैश्विक लैंगिक अंतर स्कोर 68.5% है. इसका मतलब है कि अभी भी 31.5% अंतर अनसुलझा है.
शीर्ष रैंकिंग वाले देश:
आइसलैंड (93.5%) लगातार 15वें वर्ष विश्व का सबसे अधिक लैंगिक समानता वाला देश बना हुआ है। इसके बाद शीर्ष 5 रैंकिंग में फिनलैंड, नॉर्वे, न्यूज़ीलैंड तथा स्वीडन का स्थान है।
शीर्ष 10 देशों में से 7 देश यूरोप (आइसलैंड, फिनलैंड, नॉर्वे, स्वीडन, जर्मनी, आयरलैंड, स्पेन) से हैं।
अन्य क्षेत्रों में पूर्वी एशिया और प्रशांत (न्यूज़ीलैंड चौथे स्थान पर), लैटिन अमेरिका तथा कैरिबियन (निकारागुआ छठे स्थान पर) एवं उप-सहारा अफ्रीका (नामीबिया 8वें स्थान पर) शामिल हैं।
स्पेन और आयरलैंड ने वर्ष 2023 की तुलना में क्रमशः 8 तथा 2 रैंक की वृद्धि हासिल कर वर्ष 2024 में शीर्ष 10 में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है।
क्षेत्रीय प्रदर्शन:
लैंगिक अंतराल के मामले में यूरोप (75%) अच्छी स्थिति में है इसके बाद उत्तरी अमेरिका (74.8%) तथा लैटिन अमेरिका तथा कैरिबियन (74.2%) का स्थान है।
मध्य पूर्व तथा उत्तरी अफ्रीका क्षेत्र, 61.7% के साथ लैंगिक अंतराल के मामले में अंतिम स्थान पर हैं।
दक्षिणी एशियाई क्षेत्र 8 क्षेत्रों में से 7वें स्थान पर है, जहाँ लैंगिक समता स्कोर केवल 63.7% है।
जेंडर गैप रिपोर्ट 2024 में भारत का प्रदर्शन कैसा रहा है?
भारत की रैंकिंग: भारत 146 देशों की वैश्विक रैंकिंग में दो स्थान नीचे आकर वर्ष 2023 में 127वें स्थान से वर्ष 2024 में 129वें स्थान पर पहुँच गया है।
दक्षिण एशिया में भारत, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका एवं भूटान के बाद पाँचवें स्थान पर है। पाकिस्तान, इस क्षेत्र में सबसे अंतिम स्थान पर है।
आर्थिक समानता: भारत, बांग्लादेश, सूडान, ईरान, पाकिस्तान एवं मोरक्को के समान सबसे कम आर्थिक समानता वाले देशों में से एक है, जहाँ अनुमानित अर्जित आय में लिंग समानता 30% से भी कम है।
शैक्षणिक उपलब्धि: भारत ने माध्यमिक शिक्षा नामांकन में सबसे अच्छी लैंगिक समानता दिखाई।
सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक जीवन में लैंगिक अंतराल को कम करने हेतु भारत की पहलें
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
महिला शक्ति केंद्र
महिला पुलिस स्वयंसेवक
राष्ट्रीय महिला कोष
सुकन्या समृद्धि योजना
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय
राजनीतिक आरक्षण: सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिये 33% सीटें आरक्षित की हैं।
संविधान (106वाँ संशोधन) अधिनियम, 2023 लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की विधानसभा में महिलाओं के लिये एक तिहाई सीट आरक्षित करता है, यह लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के लिये आरक्षित सीटों पर भी लागू होगा।
वैश्विक लैंगिक अंतराल सूचकांक (Global Gender Gap Index) महिलाओं और पुरुषों के बीच असमानताओं को मापने का एक महत्वपूर्ण साधन है, जिसे विश्व आर्थिक मंच ने 2006 में लॉन्च किया। यह सूचकांक चार प्रमुख क्षेत्रों में आर्थिक भागीदारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और राजनीतिक सशक्तिकरण में अंतर को मापता है।
इसकी सहायता से सरकारें, संगठन और समाज लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक कदम उठा सकते हैं। हर साल इस सूचकांक के परिणामों से यह स्पष्ट होता है कि विभिन्न देशों ने लैंगिक समानता की दिशा में कितना प्रगति की है और किन क्षेत्रों में अभी और सुधार की आवश्यकता है।
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FAQ
वैश्विक लैंगिक अंतराल सूचकांक कब लॉन्च किया गया था?
वैश्विक लैंगिक अंतराल सूचकांक पहली बार 2006 में विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) द्वारा लॉन्च किया गया था। इस सूचकांक का उद्देश्य विभिन्न देशों में पुरुषों और महिलाओं के बीच असमानताओं को मापना है और सुधार की दिशा में कार्य करना है।
2023 में वैश्विक लैंगिक अंतराल सूचकांक में भारत का स्थान क्या था?
2023 में वैश्विक लैंगिक अंतराल सूचकांक में भारत का स्थान 127वां था। यह सूचकांक 146 देशों की सूची में जारी किया गया था, जहां भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में लैंगिक असमानता को कम करने के लिए प्रयास किए हैं, लेकिन अभी भी काफी सुधार की आवश्यकता है।
किस देश ने 2023 में वैश्विक लैंगिक अंतराल सूचकांक में शीर्ष स्थान प्राप्त किया?
2023 में वैश्विक लैंगिक अंतराल सूचकांक में आइसलैंड ने शीर्ष स्थान प्राप्त किया। आइसलैंड लगातार कई वर्षों से इस सूचकांक में पहले स्थान पर है, क्योंकि इसने लैंगिक समानता के विभिन्न क्षेत्रों में सबसे अधिक सुधार किए हैं।
2024 के वैश्विक लैंगिक अंतराल सूचकांक की रिपोर्ट कब जारी की जाएगी?
2024 के वैश्विक लैंगिक अंतराल सूचकांक की रिपोर्ट जून या जुलाई 2024 में जारी होने की संभावना है। विश्व आर्थिक मंच हर साल इस सूचकांक को प्रकाशित करता है, जिसमें विभिन्न देशों की लैंगिक समानता की स्थिति का आकलन किया जाता है।
2006 में पहले वैश्विक लैंगिक अंतराल सूचकांक में कौन से देश शीर्ष पर थे?
2006 में, जब पहला वैश्विक लैंगिक अंतराल सूचकांक जारी किया गया था, तब शीर्ष देशों में आइसलैंड, नॉर्वे, और फिनलैंड शामिल थे। ये देश आज भी लैंगिक समानता के मामलों में विश्व के सबसे प्रगतिशील देशों में गिने जाते हैं।
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